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बिहार विधानसभा चुनाव के बाद प्रशांत किशोर की राजनीतिक सक्रियता
बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद महागठबंधन के नेता लगभग गायब हैं, जबकि जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर खुलकर अपनी बातें रख रहे हैं। चुनावी हार के बावजूद, PK ने आगे बढ़ने के लिए अपने इरादे स्पष्ट किए हैं और विपक्ष की मुख्य धारा में अपने आप को स्थापित करने की चेष्टा कर रहे हैं।
जन सुराज का प्रदर्शन
अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशांत किशोर ने स्वीकार किया कि जन सुराज का प्रदर्शन उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। पार्टी को लगभग 3.34% वोट शेयर मिला, लेकिन वह एक भी सीट हासिल नहीं कर सके। 238 में से 236 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई, हालांकि 129 सीटों पर जन सुराज तीसरे स्थान पर और एक सीट पर दूसरे स्थान पर रहे।
नीतीश कुमार को चेतावनी
प्रशांत किशोर ने कहा कि यदि नीतीश कुमार की नई एनडीए सरकार अपने वादों के अनुसार 1.5 करोड़ महिलाओं को 2-2 लाख रुपये प्रदान करती है, तो वे राजनीति और बिहार छोड़ देंगे। उन्होंने इस वादे को चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी मशीनरी द्वारा बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने का आरोप लगाया। इस संदर्भ में, PK ने NDA सरकार को 6 महीने का समय दिया है।
महिलाओं के अधिकारों के लिए काम
प्रशांत किशोर ने महिलाओं के लिए एक हेल्पलाइन नंबर- 9121691216 जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि जन सुराज के कार्यकर्ता सभी महिलाओं की मदद करेंगे, ताकि वे सरकारी दफ्तरों में अपनी मांग रख सकें।
मौन उपवास का आयोजन
20 नवंबर को, नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह के दिन, प्रशांत किशोर गांधी आश्रम में 24 घंटे का उपवास और मौन रखेंगे। यह वही स्थान है जहाँ महात्मा गांधी ने 1917 में सत्याग्रह की शुरुआत की थी। इस स्थान के चुनाव से PK ने अपने संघर्ष और आत्मशुद्धि के संदेश को स्पष्ट किया।
विपक्ष की स्थिति
चुनाव परिणामों के बाद RJD नेता तेजस्वी यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी दोनों ही सक्रियता से दूर हैं। तेजस्वी यादव पारिवारिक विवादों में उलझे हुए हैं, जबकि राहुल गांधी ने चुनाव को चौंकाने वाला और अनुचित बताया। इन हालात में, प्रशांत किशोर की सक्रियता उन्हें भारतीय राजनीति में एक प्रमुख विपक्षी नेता के रूप में उभारी है।
राजनीतिक दृष्टिकोण
प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने भले ही गलतियाँ की हों, लेकिन विभाजनकारी राजनीति या गरीबों का वोट खरीदने का निर्णय नहीं लिया। उन्होंने भविष्यवाणी की थी कि चुनाव में जन सुराज या तो अर्श पर होगी या फर्श पर। 20 नवंबर को PK फिर से पश्चिम चंपारण लौटेंगे, जहां उन्होंने 2 अक्टूबर 2022 को जन सुराज आंदोलन की शुरुआत की थी। उनके मौन उपवास को गांधीवादी संघर्ष का प्रतीक माना जा रहा है।
चुनावी हार के बावजूद, PK की रणनीतियां और जनता से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता उन्हें बिहार में सबसे प्रमुख विपक्षी नेता बना रही हैं। महिलाओं के मुद्दों को उठाने के उनके प्रयास और NDA सरकार को चुनौती देने का उनका तरीका उनके इरादों की स्पष्टता दर्शाता है।
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