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यमन में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब की चिंताएँ
यमन में बढ़ती संघर्षों की स्थिति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर *संयुक्त अरब अमीरात* (UAE) और *सऊदी अरब* के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, यमन में दक्षिणी अलगाववादी गुट *साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल* (STC) ने हदरामौत और महरा प्रांतों के महत्वपूर्ण हिस्सों पर नियंत्रण स्थापित किया है, जो कि यूएई के सहयोग से है। इस बीच, सऊदी अरब ने यूएई को एक संभावित खतरे के रूप में देखा है और चेतावनी दी है कि वह यमन से अपनी सेनाएँ वापस बुला सकता है।
सऊदी अरब और यूएई के बीच तल्खी
*साउदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल* ने 1 जनवरी को अदन एयरपोर्ट पर सऊदी अधिकारियों द्वारा एक विमान को लैंड करने की अनुमति नहीं दी। इस घटना ने तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि सऊदी अरब यूएई की गतिविधियाँ संदिग्ध मानता है। UAE के राष्ट्रपति *मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान* के पाकिस्तान दौरे के बाद सऊदी प्रिंस *मोहम्मद बिन सलमान* का क्रोध भी सामने आया।
पाकिस्तान में सैन्य नेतृत्व की स्थिति
सऊदी प्रिंस का रुख और उसके प्रभाव
आदिल राजा के अनुसार, आसिम मुनीर वर्तमान में यूएई के राष्ट्रपति के निर्देशों का पालन कर रहे हैं। वहीं, सऊदी प्रिंस सलमान का मानना है कि *इमरान खान* को जेल से रिहा किया जाना चाहिए। उनके इस गुस्से के कारण मुनीर में चिंता बढ़ गई है, क्योंकि प्रिंस ने हाल ही में मुनीर को सम्मानित किया, लेकिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए। इस सबके पीछे क्षेत्रीय राजनीति की जटिलता और ताकत के संतुलन का संघर्ष स्पष्ट हो रहा है।
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