रांची: हजारीबाग स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा के पूर्व सुपरिटेंडेंट जितेंद्र सिंह के कार्यकाल के दौरान की गतिविधियों का पर्दाफाश अब होने लगा है। जानकारी के अनुसार, उन्होंने अपने सरकारी आवास पर 10 पालतू कुत्तों की देखरेख के लिए 18 जेलकर्मियों को तैनात किया था। इन कर्मियों की उपस्थिति बायोमीट्रिक से दर्ज होती थी। जब ड्यूटी रोस्टर तैयार किया जाता था, तो इन कर्मियों की ड्यूटी सुपरिटेंडेंट के निवास पर लगाई जाती थी। यह सभी कर्मी जेल के सफाई कर्मचारी और अन्य पदों पर तैनात हैं। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब ड्यूटी रोस्टर रजिस्टर मुख्यालय में जेल आईजी के पास पहुंचा। इसके बाद आईजी ने तुरंत मामला संज्ञान में लिया। जितेंद्र सिंह को इस विषय में सोमवार को दूसरी बार शोकॉज किया गया। सुपरिटेंडेंट के आवास पर तैनात सभी कर्मियों को वापस जेल में उनकी पुरानी ड्यूटी पर भेज दिया गया है। जितेंद्र सिंह ने 27 नवंबर 2023 को हजारीबाग जेल में अपनी सेवा शुरू की थी। इसके अलावा, जमीन घोटाले में जेल में बंद विनय सिंह को विशेष सुविधाएं प्रदान करने के आरोप भी उनकी कार्रवाई से जुड़े हुए देखे जा रहे हैं।
ACB की कार्रवाई के तहत पूर्वी सिंहभूम के DC से पूछताछ
पूर्व सुपरिटेंडेंट जितेंद्र सिंह पर यह आरोप भी है कि उन्होंने जेल में बंद सजायाफ्ता कैदियों की दैनिक मजदूरी का आधा हिस्सा अपने पास रख लिया। वर्तमान में जेल में लगभग 900 सजायाफ्ता कैदी हैं, जिनमें से 150 से अधिक कैदियों ने सरकार को यह शिकायत की थी कि उन्हें मिलने वाली दैनिक मजदूरी में से आधी राशि जेलकर्मियों द्वारा ले ली जाती है। यह धनराशि पूर्व सैनिक कक्षपाल शंभु साव द्वारा वसूली जा रही थी। कैदियों की शिकायत पर जांच के लिए आईजी जेल ने एक तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम का गठन किया है। इस टीम के अध्यक्ष एआईजी तुषार रंजन हैं, जिसमें बंदी कल्याण पदाधिकारी और एक प्रोबेशनल ऑफिसर भी शामिल हैं। तुषार रंजन की टीम ने अपनी जांच शुरू कर दी है। कक्षपाल शंभू साव को गढ़वा जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है।
बंदी पारिश्रमिक के नियम और शिकायतें
हजारीबाग जेल घोटाला: बंदी पारिश्रमिक का नियम क्या कहता है?
जेल नियमों के अनुसार, सजायाफ्ता कैदियों को उनकी योग्यता के आधार पर कार्य दिया जाता है और उसके अनुरूप पारिश्रमिक अनुदानित किया जाता है। 2015 के नियमों के अनुसार, अकुशल कैदियों को 91 रुपए, कुशल कैदियों को 113 रुपए और अति कुशल कैदियों को 144 रुपए प्रतिदिन दिए जाते हैं। मजदूरी का एक तिहाई हिस्सा पीड़ित पक्ष को दिया जाता है। कैदियों ने यह भी आरोप लगाया है कि योग्यता के अनुसार दिए जाने वाले कार्यों में द्वेषभावना से मनमानी की जाती है, जिसके परिणामस्वरूप उनकी मजदूरी प्रभावित होती है।
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