Table of Contents
धनबाद में नशीली कफ सिरप के अंतरराज्यीय तस्करी का भंडाफोड़
धनबाद में नशीली कफ सिरप के अवैध कारोबार का एक नया खुलासा हुआ है। जांच के दौरान सामने आया है कि इस रैकेट में कई लोग शामिल हैं, जिनमें शुभम जायसवाल और एबॉट कंपनी के कुछ अधिकारी भी शामिल हैं। यह नेटवर्क झारखंड के धनबाद स्थित देवकृपा मेडिकल एजेंसी के माध्यम से संचालित हो रहा था, जहां कोडीन युक्त फार्माडोल कफ सिरप की बड़े स्तर पर सप्लाई की जा रही थी।
अमित सिंह का बड़ा निवेश, 5 लाख से लाखों तक
अमित सिंह, जिसे ‘टाटा’ के नाम से जाना जाता है, ने बताया कि उसने इस धंधे में शुरू में 5 लाख रुपये का निवेश किया था। इसके बाद उसे काफी जल्दी 20 से 22 लाख रुपये की कमाई हुई, जिससे उसने अपने नेटवर्क को और मजबूती प्रदान की।
फर्जी कंपनियों के माध्यम से करोड़ों का कारोबार
शुभम जायसवाल ने वाराणसी में “शुभ मेडिक्ल” नाम की एक फर्जी कंपनी बनाई। इसके अतिरिक्त, और भी फर्जी कंपनियां बनाई गईं, जिनके जरिए कोडीन युक्त कफ सिरप का व्यापार किया जा सकता था। इन कंपनियों ने लगभग 8 लाख रुपये का अतिरिक्त अवैध मुनाफा कमाया।
देवकृपा मेडिकल एजेंसी की संदिग्ध भूमिका
जांच में पता चला कि धनबाद की देवकृपा मेडिकल एजेंसी ने इस तस्करी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एजेंसी का उपयोग कफ सिरप का स्टॉक घुमाने और ट्रांसपोर्ट के कागजी दस्तावेज तैयार करने के लिए हो रहा था। इस संदर्भ में एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है।
एबॉट कंपनी के अधिकारियों से सीधी संबंध
अमित सिंह ने खुलासा किया कि एबॉट कंपनी के कुछ अधिकारी भी इस मामले में शामिल हैं। कुल मिलाकर 100 करोड़ रुपये से अधिक का कफ सिरप अवैध रूप से खरीदा गया था, जिसे दस्तावेजों में फर्जी नामों से सप्लाई दिखाकर बेचा गया।
पत्नी के खातों से करोड़ों की लेन-देन की गई
इस अवैध कारोबार की आय को सफेद करने के लिए अमित सिंह ने अपनी पत्नी साक्षी सिंह के बैंक खातों का उपयोग किया, जिसके माध्यम से करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ।
शुभम जायसवाल का फरार होना
रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद शुभम जायसवाल अपने साथी करण सिंह और गौरव जायसवाल के साथ फरार हो गया है। वह अब फर्जी नामों से संवाद करने का प्रयास कर रहा है।
अमित सिंह का आपराधिक इतिहास
अमित सिंह पर पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिसके अंतर्गत धारा 420, 467, 468, 471, 120बी और 201 शामिल हैं।
देवकृपा मेडिकल एजेंसी और एबॉट कंपनी पर शिकंजा
एसटीएफ और ड्रग विभाग अब देवकृपा मेडिकल एजेंसी और एबॉट कंपनी के अधिकारियों की संदिग्ध गतिविधियों की गहराई से जांच कर रहे हैं। संभावित गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आ रही है।
Have any thoughts?
Share your reaction or leave a quick response — we’d love to hear what you think!
