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पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव: अमेरिकी सांसद की चिंता
न्यूयॉर्क। पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय, जिसमें हिंदू, सिख और ईसाई शामिल हैं, उनके प्रति सरकार का रवैया समय-समय पर भेदभावपूर्ण देखा जा रहा है। यह मामला अब अमेरिका के एक सांसद की निगाह में आया है, जिन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता व्यक्त की है।
पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा
हाल ही में पाकिस्तान की मानव अधिकार संस्था ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें स्पष्ट किया गया कि इस वर्ष अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में गंभीर वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू और ईसाई लड़कियों का जबरन धर्मांतरण एवं नाबालिगों से बिना परिवार की सहमति के विवाह करने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।
सीनेटर जिम रिश्च का बयान
अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के अध्यक्ष, सीनेटर जिम रिश्च ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में पाकिस्तान की सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का ईशनिंदा कानून और अन्य भेदभावपूर्ण नीतियाँ अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन कर रही हैं।
मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट
पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग की अगस्त में जारी रिपोर्ट, जिसका शीर्षक “स्ट्रीट्स ऑफ फियर: फ्रीडम ऑफ रिलिजन ऑर बिलीफ इन 2024/25” है, में अल्पसंख्यकों, विशेषकर अहमदियों, हिंदुओं और ईसाइयों के अधिकारों के हनन के बारे में बातें हुई हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईशनिंदा के आरोप में मॉब लिंचिंग की घटनाएँ बढ़ रही हैं।
समाज में असहिष्णुता का बढ़ता खतरा
रिपोर्ट में न केवल हेट स्पीच की बढ़ती घटनाओं की और ध्यान दिलाया गया है, बल्कि इससे नागरिक अधिकारों में कमी और कट्टरपंथियों के हौसले में वृद्धि होने की संभावना भी जताई गई है। मानवाधिकार आयोग ने पाकिस्तान की सरकार से ईशनिंदा के मामलों की छानबीन के लिए एक विशेष आयोग गठन करने का आग्रह भी किया है।
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