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चाईबासा (झारखंड): एक मां अपने घर के दरवाजे पर फूट-फूट कर रो रही है, यह देखकर दिल दहला देता है। उसकी बेटी, जो परिवार के आर्थिक ताने-बाने को जोड़ने में मददगार थी, अब इस दुनिया में नहीं रही। वह अपनी माता-पिता के लिए एक सहारा थी, जो जंगल से पत्ते चुनकर उन्हें बाजार में बेचती थी। ऐसे में उसकी अनुपस्थिति ने एक गहरे शोक का माहौल बना दिया है।
पिछले शुक्रवार को, जब उसकी बेटी पत्ते चुनने जंगल गई थी, वहां एक आईईडी विस्फोट हुआ। इसी विस्फोट ने उस बेटी की जान ले ली, जिसका नाम फूलो धनवार था। उसका क्षत-विक्षत शव जब घर आया, तो पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ गिर पड़ा।
सरकार से सहायता की उम्मीद
कोलबोंगा के बगारी टोला में हुए इस हादसे ने फूलो के परिवार को तोड़कर रख दिया है। उसकी मां, झालो धनवार और छोटा भाई इस दुख में डूबे हैं, जबकि पिता सामू धनवार और बड़ा भाई शव को पोस्टमार्टम के लिए ले गए हैं। फूलो ने आर्थिक कठिनाइयों के कारण पढ़ाई छोड़ दी थी, और परिवार का मुख्य सहारा बन गई थी। अब परिवार सरकार से सहायता की आस रखता है। जो अपने परिवार की सबसे बड़ी संतान होने के नाते, एक अद्वितीय सहारा थी। उसकी माता बार-बार कहती हैं कि “अब घर का सबसे बड़ा हाथ नहीं रहा।”
ग्रामीणों की दुर्दशा
सारंडा में इस समय नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष जारी है। सुरक्षा बल नक्सलियों को समाप्त करने के लिए अभियान चला रहे हैं, जबकि नक्सलियों का प्रयास है कि वे अपने अस्तित्व को बनाए रखें। इस संघर्ष ने ग्रामीणों की जिंदगी को बुरा बना दिया है।
वन उत्पाद पर निर्भरता
ग्रामीण अब जंगल में काम करने से डरते हैं क्योंकि यहां बारूद बिछा हुआ है। सारंडा के निवासी अपने परिवार का भरण-पोषण वन उत्पादों पर करते हैं। नक्सलियों के आईईडी भय ने उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर बना दिया है। अब इनकी जिंदगी मौत के साए में गुजर रही है।
खाने-पीने की कमी
इन ग्रामीणों की मदद करने वाला कोई नहीं है। नक्सली उन्हें जंगल जाने से मना करते हैं, तो पुलिस भी इसी तरह की सलाह देती है। लेकिन राशन और पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। जान लेने वाले विस्फोटों के बीच जीवन जीने का संघर्ष क्या होता है, यह जानने के लिए सारंडा जाइए, जहां हर किसी की आंखों में डर और संघर्ष झलकता है।
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