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झारखंड में कांग्रेस पार्टी का अंदरूनी कलह
रांची: झारखंड में कांग्रेस पार्टी के भीतर की राजनीतिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। हाल ही में, बिहार महिला कांग्रेस की अध्यक्ष शरबत जहां फातिमा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जो कि पार्टी में गहरे अंतर्द्वंद्व को उजागर करता है।
फातिमा का इस्तीफा और आरोप
फातिमा ने इस्तीफे के साथ पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पर इस संबंध में पोस्ट करते हुए कहा कि टिकट वितरण में उन्हें जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है, खासकर महिला उम्मीदवारों की कमी को ध्यान में रखते हुए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके 25 वर्षीय राजनीतिक सफर में नैतिकता और निडरता हमेशा उनके लिए महत्वपूर्ण रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में महिलाओं को कांग्रेस पार्टी में केवल 8% टिकट प्रदान किए गए, जिसके परिणामस्वरूप महिला नेतृत्व का प्रतिनिधित्व दोनों सदनों में समाप्त हो गया।
महिला नेतृत्व पर चिंता
फातिमा ने आगे कहा कि वे महिला नेतृत्व की स्थिति को लेकर गहरे दुख और आत्म-विश्लेषण में हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण महिला सशक्तीकरण के मूल सिद्धांतों की अवहेलना को बताया। उन्होंने आदरणीय सोनिया गांधी का उदाहरण देते हुए उनके नैतिक मूल्यों की प्रशंसा की और कहा कि ऐसी स्थिति में उनके पद पर रहना उचित नहीं है।
पार्टी के भीतर असंतोष
इस बीच, बिहार कांग्रेस में विवाद और बढ़ता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने 43 पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इससे नाराज सभी नेता पटना स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर धरने पर बैठ गए हैं, और प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए प्रदेश प्रभारी कृष्ण अलावरू और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के हटाने की मांग की है। इस पूरे घटनाक्रम में पार्टी का कोई आधिकारिक बयान अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।
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